धर्म

धर्म/ कर्म से स्वर्ग मिल जाता है पर भगवान नहीं मिलते. धर्म/ कर्म सही सही किया जाये तो पाप नष्ट होता है, ह्रूदय शुद्ध नहीं होता

स्वर्ग में सब सुख है, बहुत सुख है पर माया रहित नहीं है. पुण्य का फल खतम होते ही नीचली योनी में आना पडता है

भगवान की क्रूपा से ही उनकी प्राप्ती हो सकती है